राम नवमी – एकता का एक त्योहार!

शांति, सद्भाव और भाईचारे के आदर्श का उपदेश जिसके लिए श्री राम खड़े थे और क़ुरान जो उपदेश देता है, वे समान हैं। रामनवमी शांति और सद्भाव को फैलाने, एकजुट होने के लिए एक साथ आने का एक अवसर है न कि समाज को बाँटने और भेदभाव करने का कोई मौक़ा !

हर साल हमारे हिंदू भाई-बहन श्रीराम के जन्म के अवसर पर हर्ष उल्लास के साथ रामनवमी का त्योहार मनाते हैं। देश के कई हिस्से में इस त्योहार के अवसर पे जुलूस भी निकाले जाते हैं। जहाँ पूरे देश में ख़ुशी का माहौल रहता है वहाँ ये भी अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि इस ख़ुशी के त्योहार के दिन भी हमें देश के अलग अलग इलाकों से हिंसा और नफ़रत की भी घटनाएँ सुनने को मिलती है। ये कुछ असमाजिक लोग है जो इस पावन अवसर पे भी हिंसा और घृणा को भड़काने से नही चुकते ।

श्री राम के आदर्शों को समझना और उनके अनुसार जीवन गुज़ारना

अगर एक व्यक्ति जो रामनवमी का त्योहार खूब धूम धाम से मनाता है पर उसके जीवन में श्रीराम के आदर्श दूर दूर तक दिखने को नहीं मिलता हो वहीँ एक दूसरा व्यक्ति जो जिंदगी में श्रीराम के आदर्शों पे चलता भी हो और राम नवमी भी मनाता हो, इन दोनों में आप किसे श्रीराम का सच्चा भक्त कहेंगे? श्रीराम का हर सच्चा भक्त इस बात से सहमत होगा कि श्रीराम के आदर्शों को जीवित रखने के लिए ही रामनवमी मनाई जानी चाहिए।

राम राज्य – शांति, भाईचारे और सद्भाव का एक राज्य

एक सच्चे राम भक्त के लिए, श्री राम से सच्चे प्रेम का मतलब यह होगा कि उन्होंने जिस मार्ग पर अपना पूरा जीवन गुज़ार दिए एवं जिन आदर्शों का उन्होंने अनुसरण किया, उनका भक्त भी अपने जीवन में उसी मार्ग पे चलते हुए उन्ही आदर्शों का अनुसरण करें

रामराज्य में लोग कैसे रहते थे? क्या वे आपस में शांति व सद्भाव से रहते थे या वे हमेशा एक-दूसरे के साथ लड़ते रहते थे? राम राज्य में शांति प्रचलित थी या नफरत? जाहिर है, शांति और सद्भाव। अगर राम राज्य लोगों के बीच झगड़ा, नफरत और दुश्मनी से भरा होता, तो आज राम राज्य के बारे में कौन बात करता ? कृपया सोचें।

यदि श्री राम आज जीवित होते और भारत में हमारे बीच होते, तो क्या हम वास्तव में यह विश्वास कर सकते हैं कि वह लोगों के बीच घृणा और शत्रुता का कभी समर्थन करते ? क्या हम ये मान सकते है कि वह लोगों को एक-दूसरे के साथ लड़ने और नफरत फैलाने की अनुमति देते ? कोई भी समझदार व्यक्ति का उत्तर निःसंदेह ना में होगा। यदि ऐसा है तो श्रीराम को अवतार मानने का दावा करने वाले कुछ लोग कैसे नफरत और वैमनस्य के कृत्यों में लिप्त हो सकते हैं? हम इस बारे में क्यों नहीं सोचते?

रामनवमी – भाईचारा और शांति फैलाने का अवसर

श्री राम के सच्चे भक्तों को राम नवमी के अवसर का उपयोग श्री राम के आदर्शों के बारे में लोगों के बीच जागरूकता फैलाने के लिए करना चाहिए और सभी समुदायों के बीच भाईचारे, शांति और सद्भाव एवं सुविधाजनक बनाने वाले कार्य करना चाहिए।

मुसलमान और रामनवमी

मुसलमानों को खुले दिमाग का होना ज़रूरी है और उन्हें समझना चाहिए कि श्री राम ने शांति, सद्भाव और भाईचारे के जिन आदर्शों का प्रचार किया था, वही उपदेश इस्लाम भी देता है। इसलिए, एक सच्चे मुसलमान का शांति, सद्भाव और भाईचारे के सार्वभौमिक और शाश्वत आदर्शों के विरुद्ध राय नहीं हो सकता है। इसलिए, उन्हें प्यार और शांति फैलाने के लिए हिंदू भाइयों और बहनों तक पहुंचना चाहिए क्योंकि कुरान मुसलमानों को यही करने के लिए कहता है।

क़ुरान और सार्वभौमिक भाईचारा

ईश्वर कुरान में सार्वभौमिक भाईचारे की शिक्षा देता है। ईश्वर कुरान में कहता है:

ऐ लोगो! निस्संदेह हमने तुम्हें एक पुरुष और स्त्री से पैदा किया है और तुम्हें जातियों और परिवारों में बनाया है, ताकि तुम एक-दूसरे को जान सको। निस्संदेह ईश्वर के साथ तुममें से सबसे अधिक आदरणीय वह है जो सबसे अधिक धर्मी है। निस्संदेह ईश्वर सर्वज्ञ, सर्वज्ञ है

अध्याय 49, छंद 13

जैसा कि आप कुरान की इस आयत में स्पष्ट रूप से देख सकते हैं, कुरान यह स्पष्ट करता है कि भगवान ने इस दुनिया में सभी मनुष्यों (राष्ट्रीयताओं और जाति के बावजूद) को एक आदमी और एक महिला से बनाया है। इसका मतलब यह है कि, हम सभी एक ही माता-पिता के संतान हैं जिससे मानवता के सभी भाइयों और बहनों की रचना हुई है।

ईश्वर ने हमें अलग-अलग राष्ट्रों और परिवारों में पैदा लड़ने या भेदभाव करने के लिए नहीं किया है बल्कि एक-दूसरे को समझने और जानने के लिए किया है। ईश्वर केवल यह देखता है कि कौन धर्मी है और जो व्यक्ति हम में धर्मी है, वही श्रेष्ठ है। एक व्यक्ति एक मुस्लिम हो सकता है, लेकिन अगर वह धर्मी नहीं है, तो वह ईश्वर के सामने सम्मानित नहीं है।

क्या तुम जानते हो कि अल्लाह मुसलमानों का व्यक्तिगत ईश्वर नहीं है?

अल्लाह एक अरबी शब्द है जिसका अर्थ है ईश्वर।

उदाहरण : अंग्रेजी में हम गॉड कहते हैं, हिंदी में ईश्वर कहते हैं, कन्नड़ में देवारू आदि कहते हैं। अरबी में हम अल्लाह कहते हैं। बस। अलग-अलग भाषाओं में ईश्वर के लिए अलग-अलग नाम हैं । तो हम सभी को आपसी मतभेद मिटाकर उस एक ईश्वर की ओर पलटना चाहिए ।

समाप्ति

शांति, सद्भाव और भाईचारे के आदर्श का उपदेश जिसके लिए श्री राम खड़े थे और क़ुरान जो उपदेश देता है, वे समान हैं। यदि कोई इसे समझता है, तो वे इस निष्कर्ष पर पहुंचेंगा कि रामनवमी शांति और सद्भाव को फैलाने, एकजुट होने के लिए एक साथ आने का एक अवसर है न कि समाज को बाँटने और भेदभाव करने का कोई मौक़ा !

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